जानिए Madhya Pradesh Ki Rajdhani Kya Hai – Capital Of MP

Madhya Pradesh Ki Rajdhani Kya Hai –आज इस पोस्ट में हम जानेंगे की मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Ki Rajdhani) की राजधानी कहा है और साथ ही ये भी जानेंगे की मध्यप्रदेश एवं मध्यप्रदेश की राजधानी में कौन–कौन से स्थान प्रसिद्ध है?

मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश की राजधानी (Madhya Pradesh Ki Rajdhani)के बारे में हम आपको विस्तारपूर्वक बताएंगे , तो जानने के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े और समझे इसी लिए हमने इस आर्टिकल को लिखा है ,ताकि आप मध्यप्रदेश की राजधानी के बारे में पूरा जान पाए। तो अब हम इस पोस्ट को आगे बढ़ाते है।

मध्यप्रदेश की राजधानी कहा है( Capital of Madhya Pradesh(M.P)

madhya prdesh ki rajdhani

मध्यप्रदेश की राजधानी “भोपाल” है। भारत देश के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल है । यहां कई छोटे–बड़े तालाब है इसीलिए इसे ‘झीलों की नगरी’ तथा राजा भोज की नगरी कहा जाता है और भोपाल जनपद का प्रशासनिक मुख्यालय भी है।

मध्यप्रदेश राज्य 1 नवंबर 2000 तक भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य था इसी दिन मध्यप्रदेश राज्य से 16 जिले अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना कर दी गई थी।

मध्य प्रदेश की राजधानी का इतिहास

भोपाल की स्थापना परमार राजा भोजने 1000–1055 ईसवी में की थी। उनके राज्य के राजधानी धार थी जो कि वर्तमान में मध्यप्रदेश राज्य का एक जिला है शहर का पुराना नाम भोजपाल था शहर के नाम से एक मान्यता और जुड़ी हुई है जिसके अनुसार भोपाल शहर का प्राचीन नाम भूपाल था। भुपाल नाम एक अन्य राजा भुपाल के नाम से पड़ा।

परमार राजाओं के अस्त के बाद यह शहर कई बार लूट का शिकार हुआ परमार राजाओं के बाद भोपाल शहर में अफगान सफाई सिपाही दोस्त मोहम्मद खान(1708 –1740) का शासन रहा इसी कारण से भोपाल को नवाबी शहर भी माना जाता है

कुछ समय बाद गोंड महारानी कमलावती की मदद करने के लिए खान को भोपाल गांव भेंट कर दिया गया रानी कमलावती की मौत के बाद खान ने गोंड राज्य को अपने कब्जे में कर लिया।

महारानी कमलावती के स्मृति के रूप में भोपाल शहर के बड़े तालाब के पास इन्हीं के नाम पर एक पार्क का नाम कमला पार्क का निर्माण किया गया। इसके बाद खान ने भोपाल गांव की किलाबंदी करके उसे शहर में तब्दील कर दिया ।

साथ ही उनको नवाब की पदवी अपना ली और इसी तरह भोपाल राज्य की स्थापना हुई। खान के उत्तराधिकारीयो ने 1818 में ब्रिटिश हुकूमत के साथ संधि कर ली और भोपाल राज्य ब्रिटिश राज्य की एक रियासत बन गया।

1947 मैं जब भारत देश को स्वतंत्रता मिली तब भोपाल राज्य की वारिस आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई तथा उनकी छोटी बहन बेगम साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया। तथा 1 जून 1949 को भोपाल राज्य का भारत में विलय हो गया।

मध्यप्रदेश की राजधानी की जनसंख्या एवं क्षेत्रफल

2011 की जनगणना के अनुसार भोपाल शहर की कुल जनसंख्या लगभग 95,64,817 दर्ज ले गई थी। तथा भोपाल जिले की कुल जनसंख्या 23,68,145 दर्ज की गई थी पुरुषों की संख्या 12,39,368 महिलाओं की संख्या 11,28,767 थी । जिसमें करीब 56% हिंदू, 40% मुस्लिम, तथा 4% अन्य धर्म से संबंधित थे।

साक्षरता दर में शहर की कुल साक्षरता दर 82.26% में है जिसमे से 87.44% पुरुष की तथा 76.57% महिलाए साक्षर है। क्षेत्रफल के बाद की जाए तो भोपाल शहर का क्षेत्रफल 285.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है तथा समुद्र तल से 527 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

मध्यप्रदेश की राजधानी की भौगोलिक स्थित एवं जलवायु

भोपाल भारत के मध्य भाग में स्थित है तथा इसका निर्देशांक 23.27 उ.एवं 77.44 प. है।यह पूर्व में विंध्य पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है भोपाल एक पहाड़ी इलाके पर स्थित होने के कारण इसका भूभाग ऊंचा नीचा है एव इसके दायरे में कई छोटे पहाड़ भी आते है। जैसे कतार हिल,ईदगाह हिल,अरेरा हिल,श्यामला हिल आदि।

यह पहाड़ी इलाका होने के बावजूद इसका तापमान अधिकतर गर्म बना रहता है। जलवायु में गर्मियों में गर्म वातावरण रहता है तथा सर्दियों में हल्की ठंडी बनी रहती है।बारिश का मौसम जून से लेके अक्टूबर तक रहता है। जिसमे सामान्य वर्षा होती है। भोपाल शहर में कोलार तथा केरवा नामक नदियां हैं। बेतवा नदी का उद्गम स्थल कोलाश्र बांध के पास झिरी में है।

के शहर में दो मानव निर्मित जिले हैं जो संयुक्त रूप से भोज स्थल के नाम से जानी जाती है इनमें बड़ी झील राजा भोज द्वारा निर्मित करवाई गई थी जिसमें कुल जल ग्रहण क्षेत्र 361 वर्ग किलोमीटर है छोटी झील का निर्माण राजा भोज ने करवाया था इसके अलावा भोपाल की पहचान भोपाल के बड़े तालाब से है । तथा भोपाल नगर निगम की सीमा 289 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है।

मध्यप्रदेश की राजधानी में स्थित शिक्षण संस्थान

शिक्षा के क्षेत्र में भोपाल में कई बड़े शिक्षण संस्थान है जिनमे अनेक विश्वविद्यालय आते हैं जैसे –बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, अटल बिहारी बाजपाई हिंदी विश्वविद्यालय, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय ,भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ।

इसके अलावा अनेक राष्ट्रीय संस्थान यहां पर मौजूद हैं जिसमें मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान ,भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा यहां इंजीनियरिंग महाविद्यालय, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी,आदि

भोपाल शहर की अन्य विशेषताओं में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) का कारखाना है जिसका औद्योगिक महत्व है इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र का दूसरा मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी यहां पर स्थापित किया गया है ।भारत देश का एकमात्र वन प्रबंधन संस्थान है जोकि भोपाल में स्थित है इसका नाम भारतीय वन प्रबंधन संस्थान है यहां पर भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भी है जोकि 2015 में कार्यशील हुआ।

मध्यप्रदेश की राजधानी में स्थित पर्यटन स्थल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित पर्यटन स्थल की बात की जाए तो इस क्षेत्र में यहां के कई स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं जिसमें यहां का बड़ा तालाब ,छोटा तालाब, अभ्यारण, भारत भवन, शहीद भवन ,भीम बेटिका जैसे स्थलों का नाम आता है।

यूनेस्को द्वारा संरक्षित “सांची का स्तूप “जो पर्यटकों का एक मुख्य पर्यटन स्थल है जो की भोपाल के पास ही स्थित है भोपाल से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भोजपुर मंदिर ,भेल में स्थित श्रीराम मंदिर, बरखेड़ा प्रसिद्ध आस्था का केंद्र है यह पर्यटन स्थल पर्यटकों को काफी लुभाते हैं।

भोपाल में प्रमुख पर्यटन स्थल–

श्री राम मंदिर बरखेड़ा–भोपाल के पास भेल में स्थित श्रीराम मंदिर, बरखेड़ा में विराजे श्रीराम की स्थापना की गई है यहां की सभी मूर्तियां बहुत ही अलौकिक है करीब 3 एकड़ में फैले इस मंदिर में बहुत ही सुंदर बगीचा है जिसमें अनेक प्रकार के रंग बिरंगे खुशबूदार फूल खिलते हैं इस मंदिर में श्री राम के अलावा दुर्गा जी, योगेश्वर कृष्ण, राम भक्त हनुमान ,शंकर जी ,गुरुदेव दत्तात्रेय भी विराजते हैं इस मंदिर में ऑनलाइन दर्शन की भी व्यवस्था है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर, भोपाल

यह मंदिर करीब 7–8 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है इस मंदिर की ख्याति देश व प्रदेश के विभिन्न शहरों में फैली हुई है। भोपाल के अरेरा पहाड़ी पर पिछले 5 दशक पूर्व स्थापित बिरला मंदिर वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है मंदिर में स्थापित भगवान श्री हरि विष्णु एवं महालक्ष्मी जी की मनोहरी प्रतिमाएं स्थापित है यह प्रतिमा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकृष्ट कर रही हैं।

इस मंदिर में इस मंदिर के अंदर विभिन्न पौराणिक दृश्य की नक्काशी संगमरमर पर की गई है इन पौराणिक दृश्यों पर गीता व रामायण के उपदेश भी अंकित है इस मंदिर में विष्णु जी वह लक्ष्मी जी की प्रतिमाओं के अलावा अन्य प्रतिमा भी है जोकि शिव तथा दूसरी ओर मां जगदंबा की प्रतिमा विराजमान है इस मंदिर में मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बना विशाल शंख दर्शकों को आकर्षित करता है।

भोजेश्वर मंदिर भोजपुर

भोजपुर प्राचीन शहर है जोकि भोपाल से दक्षिण पूर्व से 28 किलोमीटर दूरी पर स्थित है ऐसा माना जाता है कि यह शहर भगवान शिव को समर्पित भोजेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है इस मंदिर का पुराना नाम सोमनाथ था ।

भोपाल से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर की स्थापना गुज्जर परमार वंश के राजा भोज ने की थी इसलिए यह स्थान भोजपुर के नाम से जाना जाता है यह स्थान भगवान शिव के मंदिर और साइक्लोपीयन बांध के लिए जाना जाता है इस मंदिर( भोजेश्वर मंदिर )की सुंदर सजावट की गई है मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है जिसके गर्भ ग्रह में लगभग साढ़े तीन मीटर लंबा शिवलिंग स्थापित है इसे भारत के सबसे विशाल शिवलिंग में शुमार किया जाता है।

भीमबेटिका गुफाएं

भोपाल से करीब 46 किलोमीटर दूर स्थित भीमबेटका की गुफाएं ऐतिहासिक काल की चित्रकरियो के लिए प्रसिद्ध है यह चित्रकारिया करीब 12000 वर्ष पूर्व की मानी जाती है। यह गुफाएं चारों तरफ से विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई है जिनका संबंध नवपाषाण काल से है।

ताज –उल –मस्जिद, भोपाल

यह मस्जिद भोपाल की विशाल मस्जिदों में से एक है मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल की आठवीं शासिका बेगम शाहजहां बे सिकंदर के शासनकाल में प्रारंभ किया गया था किंतु बेगम शाहजहां वे सिकंदर इस मस्जिद को पूरा होते हुए देख नहीं पाई और उनकी मृत्यु हो गई।

भारत भवन

भारत भवन देश के अनूठे संस्थानों में से एक है ।यह भवन 1982 में स्थापित किया गया था तथा इस भवन में अनेक रचनात्मक का प्रदर्शन किया जाता है।

शौर्य स्मारक

यह स्मारक शहर के अरेरा हिल्स इलाके में स्थित है यह स्मारक 12 एकड़ में फैला हुआ है इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 14 अगस्त 2016 को किया गया था।इस शौर्य स्मारक में पाकिस्तान व चीन से हुए युद्ध से संबंधित प्रदर्शनीया है।

इनके अलावा यहां पर अन्य पर्यटन स्थल स्थित है जैसे–मोती मस्जिद, शौकत महल, सदर मंजिल, गौहर महल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, पुरातात्विक संग्रहालय, तथा बोट क्लब आदि आते है जो की पर्यटकको को काफी पसंद आते हैं तथा भोपाल शहर की शोभा बढ़ाते हैं।

मध्यप्रदेश की राजधानी में परिवहन एवं यातातायत

परिवहन एवं यातायात की दृष्टि से देखे तो यहां पर सड़क मार्ग ,रेल मार्ग तथा वायु मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

सड़क मार्ग की बात करें तो मध्य प्रदेश राज्य और इसके पड़ोसी राज्यों के शहर से भोपाल शहर तक पहुंचने के लिए नियमित रूप से बस सुविधाएं उपलब्ध है देश के अन्य क्षेत्रों के बड़े शहरों से भी राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा यह जुड़ा हुआ है तथा निजी वाहनों से भी सड़क मार्ग यहां आने का एक अच्छा विकल्प है।

रेल मार्ग

रेल मार्ग दी यहां पहुंचने का एक बहुत ही अच्छा और सुलभ विकल्प है भोपाल का रेलवे स्टेशन देश के दूसरे बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है यहां का रेलवे स्टेशन भारतीय रेल के दिल्ली चेन्नई मार्ग पर पड़ता है बड़े शहरों से एक्सप्रेस ट्रेन यहां के लिए नियमित रूप से चलती है दिल्ली शहर को भोपाल से सीधा शताब्दी एक्सप्रेस जोड़ती है तथा भोपाल रेलवे स्टेशन से देश के किसी भी कोने में जाया जा सकता है।

वायु मार्ग

वायु मार्ग में भोपाल का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राजा भोज हवाई अड्डा पड़ता है यह शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई दिल्ली चेन्नई कोलकाता हैदराबाद आदि से यहां के लिए नियमित उड़ान ने उपलब्ध है जिसमें एयर इंडिया एवं अन्य निजी एयरलाइंस कंपनियां कार्यरत है। हवाई मार्ग से भोपाल के अन्य शहरों में आसानी से पहुंचा जा सकता है और समय भी कम लगता है।

मध्यप्रदेश की राजधानी (Madhya Pradesh Ki Rajdhani) में घटी दुर्घटना (भोपाल गैस त्रासदी)

भोपाल शहर से ,भारत देश के इतिहास मे जुड़ी सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक का नाम आता है जिसे भोपाल गैस कांड या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है इसी कारण से यह शहर सुर्ख़ियों में आ गया। 2 –3 दिसंबर वर्ष 1984 में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड पेस्टीसाइड प्लांट जोकि भोपाल में स्थित है इस कारखाने से एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था

जिसमें करीब 15,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और कई लोग शारीरिक अपंगता ,अंधेपन का शिकार भी हुए इस घटना में मिथाइल आइसोसाइनेट जहरीली गैस का रिसाव हुआ जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के रूप में किया जाता है। भोपाल गैस त्रासदी को पूरे विश्व में सबसे भयानक इंडस्ट्रियल डिजास्टर्स में गिना जाता है इसलिए 1993 में भोपाल की इस त्रासदी पर बनाए गए भोपाल अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को इस त्रासदी में पर्यावरण एवं मानव समुदाय पर होने वाली दीर्घकालीन प्रभावों को जानने के लिए कार्य सौंपा है।


इन्हे भी याद रखे –

अंतिम शब्द

दोस्तों आज इस पोस्ट के माध्यम से मैंने आपको बताया कि मध्य प्रदेश की राजधानी (Madhya Pradesh Ki Rajdhani) कहां है और मध्य प्रदेश की राजधानी में कौन-कौन से पर्यटन स्थल है साथ ही आपको मध्य प्रदेश की राजधानी (Madhya Pradesh Ki Rajdhani) के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा मैंने इस पोस्ट में आपको मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश की राजधानी के बारे में पूरा विस्तार से बताने की कोशिश की है । तो आपको मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में क्या अच्छा लगा यह हमें कमेंट के माध्यम से बताएं या आपका इस पोस्ट के संबंध में कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें जरूर बताएं।

मेरा नाम Deepak Devadaliya है मुझे शुरुआत से ही इंटरनेट और कंप्यूटर के प्रति रुचि रही है और मैं एक बीएससी कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएट हूं जहां पर इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आपके साथ ब्लॉगिंग संबंधी सभी चीजों को साझा करता हूं

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